Do Dil Ek Dhadkan
अबतक आदत नही मुझे के, हसते रोते खुदको सवार लेता हु!
तुमने भी मोहब्बत की होगी, झुठा सही खुदको जवाब देता हु!
भुल गये? याद हे? या लगता तुम्हे, मैं बस फरियाद करता हु??
क्या ही फरक पडता तुम्हे, चाहे रोज मे खुदको बरबाद करता हु!